Meaning of exceptional children
विशिष्ट बालकों को अपवादी बालक भी कहा जाता है। सामान्यतः विशिष्ट बालक उन बालकों को कहा जाता है जो अपनी क्षमताओं, योग्यताओं, व्यवहार, व्यक्तित्व आदि से अपनी आयु के अन्य बालकों से अलग रहते हैं। यह भी नेता इस की उच्चता के कारण भी हो सकती है और निम्नता के कारण भी अर्थात इस प्रकार के बालकों का विकास या तो इतना तीव्र या ज्यादा होता है कि वह अन्य बालकों से आगे निकल जाते हैं या इतना कम होता है कि वह बालक आने वालों को से पिछड़ जाता है। इन दोनों ही प्रकार के बालकों को शिक्षा अलग से प्रदान की जाती है। इन बालकों के लिए अध्यापकों की नियुक्ति भी अलग से होती है।क्रो एंड क्रो (Crow & Crow) के अनुसार :-
"विशेष प्रकार या विशिष्ट शब्द किसी ऐसे गुण या उस गुण को धारण करने वाले व्यक्ति के लिए उस समय प्रयोग में लाया जाता है जबकि व्यक्ति उस गुण विशेष को धारण करते हुए अन्य सामान्य व्यक्तियों से विशिष्ट ध्यान की मांग करें या उसे प्राप्त करें और साथ ही इससे हो सके व्यवहार की क्रियाएं तथा अन्य क्रियाएं भी प्रभावित हो।"
इस प्रकार के कोई भी 2 प्राणी शारीरिक एवं मानसिक रूप से एक-दूसरे से भिन्न पाए जाते हैं। वह ना तो एक सा व्यवहार करते हैं और ना ही एक जैसी उनकी शिक्षा होती है। व्यक्तिगत मनोविज्ञान भिन्नता के विकास के पूर्व समस्त बालकों को सामान्य बालकों की श्रेणी में रखा जाता है। केवल उन थोड़े से बालकों को जो सामान्य से अत्यधिक भिन्न थे उन्हें असामान्य माना जाता था।। कालांतर में व्यक्तिगत भिन्नता के मनोविज्ञान के विकास के उपरांत उन बालकों की ओर ध्यान गया जो सामान्य से थोड़ा भी भिन्न थे। प्रत्येक विद्यालय में जहां सामान्य बालक आते हैं वहीं बहुत से विद्यार्थी ऐसे हैं जो किसी न किसी रूप में कुछ प्रतिभाशाली बालक, कुछ मंदबुद्धि बालक, कुछ पिछड़े बालक, कुछ समस्यात्मक बालक तथा कुछ शारीरिक दोषों से युक्त बालक होते हैं। इन बालकों की कुछ अपनी व्यक्तिगत विशेषताएं होती हैं। इन विशेषताओं के कारण यह बालक आने वालों को से भिन्न होते हैं।
अतः ऐसे बालकों को विशिष्ट बालक कहा जाता है। इस प्रकार विशिष्ट बालक एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसके कुछ ऐसे लक्षण हैं जिनके कारण दूसरे लोग उनकी और विशेष रूप से आकर्षित होते हैं तथा अन्य लोगों का विशेष ध्यान प्राप्त करने में विशिष्ट व्यक्ति सामान्य व्यक्तियों से भिन्न प्रकार के व्यवहार और क्रियाएं करने लगता है। इस प्रकार विशिष्ट बालक के संदर्भ में कहा जा सकता है कि विशिष्ट बालक वह है जो अंतः व्यक्तिगत भिन्नता रखते हुए अन्य सामान बालकों के अंतर व्यक्तिगत भिन्नता रखता है।
विशिष्ट बालक का स्पष्टीकरण विभिन्न मनोवैज्ञानिक द्वारा की गई परिभाषा ओं से और अधिक स्पष्ट हो जाएगा।
क्रो एंड क्रो (Crow & Crow) के अनुसार :-
"विशिष्ट या असाधारण शब्द ऐसे गुणों या व्यक्ति, जिसमें वह गुण है, के लिए प्रयुक्त किया जाता है जो सामान्य व्यक्ति द्वारा प्रदर्शित पुणे गुणों से इस सीमा तक विभिन्नता के लिए होता है। जिसका कारण व्यक्ति विशेष की और उसके साथियों को ध्यान देना पड़ता है या दिया जाता है और उसके कारण ही उनकी व्यवहारिक प्रतिक्रियाएं तथा कार्य प्रभावित होते हैं।"
हेक (Hock) के अनुसार :-
"विशिष्ट बालक वह है जो किसी अन्य अथवा कई गुणों की दृष्टि से सामान्य बालक से पर्याप्त मात्रा में भिन्न होता है।"
क्रिक (kirk) के अनुसार :-
"विशिष्ट बालक वह है जो सामान्य अथवा औसत बालक से मानसिक, शारीरिक तथा सामाजिक विशेषताओं से इतना अधिक भिन्न है कि वह विद्यालय व्यवस्थाओं में संशोधन अथवा विशेष सेवाएं अथवा पूरक शिक्षक चाहता है, जिससे वह अपनी अधिकतम क्षमता का विकास कर सके।"
विशिष्ट एवं सामान्य बालकों में अंतर
Difference between normal and exceptional children
विशिष्ट बालक :-- विशिष्ट बालक प्राया शारीरिक रूप से स्वस्थ होते हैं। जैसे पतले, अत्यधिक लंबे, पोलियो ग्रस्त, लंबे सिर वाले, अंधे, कम सुनने वाले तथा मोटे शरीर वाले।
- यह बालक शारीरिक रूप से ग्रस्त होने के कारण मानसिक बीमारियों से ग्रस्त होते हैं।
- विशिष्ट बालकों की बुद्धि लब्धि 140 से ज्यादा होती है या फिर औसत या सामान्य बालकों की बुद्धि लब्धि 19 से 110 से कम होती है।
- विशिष्ट बालकों का अपने निजी एवं साथियों के साथ समायोजन करना कठिन होता है।
- विशिष्ट बालक कक्षा में बताई जाने वाली सूचनाओं या बातों को या तो अति शीघ्र सीख लेते हैं या फिर बार-बार समझाने पर भी नहीं समझ पाते हैं।
- विशिष्ट बालक घर, विद्यालय या समाज में अच्छा समायोजन नहीं कर पाते हैं।
- विशिष्ट बालकों की शैक्षिक उपलब्धि या तो बहुत अच्छी है बहुत न्यून या शून्य होती है जिसके कारण प्राय असफलता का सामना करते हैं।
- विशिष्ट बालक प्राय अंतर्मुखी होते हैं और अपने में ही खोए रहते हैं।
- विशिष्ट बालक प्राय: अति आशावादी या प्रायः अति निराशावादी विचार के होते हैं जिसके फलस्वरूप ज्यादा व्यावहारिक नहीं माने जाते।
- विशिष्ट बालकों का साथियों पर प्रायः नियंत्रण नहीं होता जिसके फलस्वरूप वह प्रेम, क्रोध, ईर्ष्या, घृणा, आनंद आदि को सहज ढंग से प्रदर्शित करते हैं।
- विशिष्ट बालक प्राय: अति महत्वाकांक्षी स्वभाव के होते हैं।
- विशिष्ट बालकों में अंतर्निहित क्षमताओं को प्रस्फुटित करने हेतु विशेष शिक्षा व विशेष सेवाओं की आवश्यकता पड़ती है।
- सामान्य बालकों में अंतर्निहित क्षमताओं को प्रस्फुटित करने हेतु सामान्य शिक्षा की आवश्यकता पड़ती है।
- सामान्य बालक अति महत्वाकांक्षी नहीं होते बल्कि वे मध्य सोच रखते हैं।
- सामान्य बालक अपने संदेशों पर नियंत्रण रखने में सफल होते हैं जिसके फलस्वरूप वह प्रेम, क्रोध, ईर्ष्या, घृणा, आनंद आदि को सहज ढंग से प्रदर्शित करते हैं।
- सामान्य बालक शारीरिक रूप से स्वास्थ्य तथा खिलाड़ी शरीर के होते हैं।
- सामान्य बालक शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के कारण मानसिक बीमारियों से ग्रस्त नहीं होती जिनके कारण जल्दी तनाव व संघर्ष में नहीं आते।
- सामान्य बालकों की बुद्धि लब्धि सामान्यता 90 से 110 के बीच होती है।
- सामान्य बालक अपने निजी एवं साथियों के साथ भली-भांति समायोजन कर लेते हैं।
- सामान्य बालक कक्षा में दी गई सूचनाओं एवं बातों को भलीभांति सीख लेते हैं।
- सामान्य बालक घर, विद्यालय एवं समाज में अच्छा समायोजन स्थापित कर लेते हैं।
- सामान्य बालकों की शैक्षिक उपलब्धि अच्छी होती है जिसके कारण असफलता का मुंह नहीं देखना पड़ता है।
- सामान्य बालक प्राय उभय मुखी होते हैं जिसके कारण एक दसरे से मेलजोल बढ़ाने में माहिर होते हैं।
- सामान्य बालक पया आशावादी होते हैं तथा जीवन को व्यावहारिक ढंग से जीने की इच्छा रखते हैं।
विशिष्ट बालकों की विशेषताएँ
- विशिष्ट बालक अपनी क्षमता, बुद्धि, रुचि या व्यवहार में असाधारण रूप से भिन्न होते हैं।
- उनका विकास सामान्य बालकों की तुलना में या तो बहुत तेज़ या धीमा होता है।
- ऐसे बालक शिक्षा, सामाजिक संबंधों और आत्म-नियंत्रण में कठिनाई अनुभव कर सकते हैं।
- इन्हें अपनी संभावनाओं को प्रकट करने के लिए विशेष शिक्षण रणनीतियों की आवश्यकता होती है।
- ये बालक या तो प्रतिभाशाली (gifted) होते हैं या बाधित (disabled) - दोनों ही स्थितियों में वे सामान्य शिक्षण से परे सहायता चाहते हैं।
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