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सामाजिक असमायोजित बालक का अर्थ, परिभाषा, आवश्यकताएँ एवं विशेषताएँ

Socially Maladjusted Children: Meaning, Definition, Types, Needs, and Characteristics
मानव समाज में प्रत्येक व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने परिवेश में संतुलन स्थापित करे और सामाजिक नियमों का पालन करे। यह संतुलन ही “सामाजिक समायोजन” कहलाता है।
परंतु जब कोई बालक समाज, परिवार या विद्यालय के मानदंडों से तालमेल नहीं बिठा पाता, तो उसका व्यवहार असामान्य या अस्वीकार्य माना जाता है।
ऐसे बालक को हम “सामाजिक असमायोजित बालक” कहते हैं।

आज के तीव्र परिवर्तनशील सामाजिक परिवेश - जैसे आधुनिक जीवनशैली, पारिवारिक अस्थिरता, आर्थिक असमानता, तकनीकी प्रभाव, और मूल्यबोध का ह्रास - के कारण असमायोजित बालकों की संख्या बढ़ती जा रही है।
इन बच्चों को समझना, मार्गदर्शन देना और समाज में पुनः समायोजित करना शिक्षा जगत की एक प्रमुख चुनौती है।

1. अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition)

(क) अर्थ :-
“असमायोजन” का अर्थ है - “समाज की अपेक्षाओं, नियमों तथा मानदंडों के अनुरूप व्यवहार करने में असफलता।”
अर्थात जब बालक का व्यवहार उसके अपने विकास और दूसरों की प्रगति दोनों में बाधक बनता है, तब उसे सामाजिक असमायोजन कहा जाता है।
ऐसे बालक अक्सर अपराधी, अनुशासनहीन, झूठे, चोरी करने वाले, झगड़ालू, या समाज विरोधी व्यवहार प्रदर्शित करते हैं।

(ख) परिभाषाएँ :-
डेविस और जेनकिंस (Davis & Jenkins) के अनुसार –
“सामाजिक असमायोजित बालक वह है जो सामाजिक मानदंडों का पालन नहीं करता और अपने व्यवहार से दूसरों को हानि पहुँचाता है।”

डॉ. क्रो और क्रो (Crow & Crow) के अनुसार –
“सामाजिक असमायोजन उस स्थिति को कहते हैं जब व्यक्ति अपने पर्यावरण की अपेक्षाओं के अनुसार व्यवहार करने में असफल रहता है।”

डॉ. गुड (Good) के अनुसार –
“सामाजिक असमायोजन का अर्थ है व्यक्ति का अपने सामाजिक परिवेश में असंतुलित व्यवहार प्रदर्शित करना।”

2. सामाजिक असमायोजन के प्रकार (Types of Social Maladjustment)

डेविस और जेनकिंस ने असमायोजन को तीन मुख्य प्रकारों में विभाजित किया है -
  1. असामाजिक आक्रामक बालक (Asocial Aggressive Child)
  • ये बालक क्रोधी, झगड़ालू, और हिंसक प्रवृत्ति के होते हैं।
  • ये न तो अध्यापक की बात मानते हैं, न ही माता-पिता की।
  • संवेदनशीलता की कमी, दंड से भय न होना, और प्रभुत्व जमाने की प्रवृत्ति इनमें सामान्यतः देखी जाती है।
  1. सामाजिक अपराधी बालक (Social Delinquent Child)
  • प्रारंभ में ये बालक सामान्य व्यवहार करते हैं, परंतु गलत संगति में आने के बाद चोरी, झूठ, नशा या अन्य अनुचित कार्यों की ओर बढ़ जाते हैं।
  • ये अपने समूह के प्रति वफादार रहते हैं, पर समाज के नियमों का उल्लंघन करते हैं।
  1. अत्यधिक अवरोध आत्मक बालक (Over-Inhibited or Withdrawn Child)
  • ऐसे बालक अत्यधिक शर्मीले, भयभीत, और आत्मकेंद्रित होते हैं।
  • वे माता-पिता की अत्यधिक सुरक्षा के कारण स्वतंत्रता की भावना नहीं विकसित कर पाते।
  • सामाजिक सहभागिता से दूर रहकर धीरे-धीरे समाज से कट जाते हैं।

3. सामाजिक असमायोजन के कारण (Causes of Social Maladjustment)

सामाजिक असमायोजन के कारण अनेक और जटिल हो सकते हैं। इन्हें प्रमुख रूप से निम्न वर्गों में बाँटा जा सकता है —
(क) पारिवारिक कारण (Family Causes) :-
  • माता-पिता में झगड़ा या तलाक
  • घर का अनुशासनहीन वातावरण
  • अत्यधिक कठोर या अत्यधिक लाड़-प्यार भरी परवरिश
  • आर्थिक अभाव
  • माता-पिता का बालक के प्रति उदासीन दृष्टिकोण
(ख) सामाजिक कारण (Social Causes) :-
  • गरीबी और सामाजिक असमानता
  • गलत संगति (Bad Company)
  • नशे की प्रवृत्ति या अपराधी समाज का प्रभाव
  • अनुचित सामाजिक मूल्य या नैतिकता का ह्रास
(ग) विद्यालयीय कारण (School Causes) :-
  • अध्यापकों का दंडात्मक रवैया
  • शिक्षण पद्धति में रुचि की कमी
  • विद्यालय में असमानता या भेदभाव
  • विद्यार्थियों का उपहास या अस्वीकृति
(घ) मनोवैज्ञानिक कारण (Psychological Causes) :-
  • हीनभावना
  • असुरक्षा और भय
  • आत्मद्वेष या आत्मगौरव की कमी
  • भावनात्मक अस्थिरता
  • बुद्धि लब्धि (IQ) का निम्न स्तर

4. सामाजिक असमायोजित बालक की आवश्यकताएँ (Needs of Socially Maladjusted Children)

सामाजिक असमायोजित बालकों की आवश्यकताएँ सामान्य बच्चों से भिन्न होती हैं। उन्हें केवल भोजन, वस्त्र और शिक्षा ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सुरक्षा और सामाजिक स्वीकार्यता की भी आवश्यकता होती है।
  • भावनात्मक सुरक्षा (Emotional Security) - ऐसे बालक प्यार, समझ और सहानुभूति चाहते हैं। कठोरता या तिरस्कार उनके असमायोजन को बढ़ा देता है।
  • सामाजिक स्वीकृति (Social Acceptance) - यदि समाज और विद्यालय इन्हें स्वीकार करता है, तो उनमें सुधार की संभावना बढ़ जाती है।
  • अनुशासित स्वतंत्रता (Disciplined Freedom) - उन्हें ऐसे वातावरण की आवश्यकता है जहाँ वे स्वतंत्र रूप से अपनी अभिव्यक्ति कर सकें, किंतु अनुशासन का भी पालन हो।
  • उपयुक्त शिक्षा और मार्गदर्शन (Proper Education and Guidance) - उनके लिए विशेष शिक्षण पद्धतियाँ, खेल, व्यावसायिक प्रशिक्षण, और परामर्श सेवाएँ आवश्यक हैं।
  • सकारात्मक प्रोत्साहन (Positive Reinforcement) - उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों की प्रशंसा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाती है।

5. सामाजिक असमायोजित बालक की विशेषताएँ (Characteristics of Socially Maladjusted Children)

(क) सामान्य विशेषताएँ :-
  • स्वयं को समाज में अस्वीकारित समझना
  • आत्महीनता एवं असुरक्षा की भावना
  • दूसरों के प्रति असंवेदनशीलता
  • विद्रोही और अनुशासनहीन व्यवहार
(ख) सामाजिक विशेषताएँ :-
  • समाज विरोधी गतिविधियों में सम्मिलित होना
  • गलत मित्रमंडली का प्रभाव
  • दूसरों के प्रति आक्रोश या ईर्ष्या
  • समूह में असहयोगी व्यवहार
(ग) शारीरिक विशेषताएँ :-
  • किशोरावस्था में हार्मोनल असंतुलन
  • थकान, सिरदर्द, टॉन्सिल, या अन्य रोग
  • ऊर्जावान परंतु अनुशासनहीन स्वभाव
(घ) मनोवैज्ञानिक विशेषताएँ :-
  • कम बुद्धि लब्धि (IQ)
  • चिंता, तनाव, और अवसाद की प्रवृत्ति
  • आवेगशीलता और तर्कहीन निर्णय
  • आत्मगौरव या आत्मद्वेष की भावना
(ङ) शैक्षिक विशेषताएँ :-
  • विद्यालय में अरुचि और बार-बार स्कूल बदलना
  • कम उपलब्धि और अधिक अनुपस्थिति
  • शिक्षकों से असहयोग और मित्रों से दूरी
  • अनुशासन भंग करना या विद्यालय छोड़ देना

6. सुधार के उपाय (Remedial Measures for Social Maladjustment)

  • परिवार का सहयोग (Family Cooperation) - माता-पिता का स्नेहपूर्ण व्यवहार और संवाद बालक को भावनात्मक सुरक्षा देता है।
  • विद्यालय में सहानुभूति (Teacher’s Empathy) - शिक्षक को बालक की परिस्थितियों को समझकर उसके प्रति दंड की बजाय समझदारी दिखानी चाहिए।
  • परामर्श सेवाएँ (Counselling Services) - मनोवैज्ञानिक परामर्श (Psychological Counselling) के माध्यम से बालक की आंतरिक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
  • विशेष शिक्षा (Special Education) - ऐसे बालकों के लिए विशेष कक्षाओं, व्यक्तिगत शिक्षण विधियों और व्यावहारिक प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।
  • सामाजिक पुनर्वास (Social Rehabilitation) - समुदाय स्तर पर ऐसे कार्यक्रम होने चाहिए जो असमायोजित बालकों को समाज में पुनः स्वीकार्यता दिला सकें।
निष्कर्ष (Conclusion) :-
सामाजिक असमायोजित बालक समाज का एक संवेदनशील वर्ग हैं जिन्हें समझने, सहयोग देने और सुधारने की आवश्यकता है।
वे जन्म से असमायोजित नहीं होते; बल्कि सामाजिक, पारिवारिक और शैक्षिक परिस्थितियाँ उन्हें इस स्थिति तक ले आती हैं।
यदि शिक्षकों, माता-पिता और समाज के सभी घटक एकजुट होकर प्रेम, सहानुभूति और मार्गदर्शन प्रदान करें, तो ये बालक भी सकारात्मक, आत्मनिर्भर और समाजोपयोगी नागरिक बन सकते हैं।

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