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दृष्टि बाधित बालकों का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ और शैक्षिक प्रावधान

Meaning, Definition, Characteristics and Educational Provisions of Visually Impaired Children

1. अर्थ (Meaning) :-

दृष्टि बाधित (Visually Impaired) बालक वे होते हैं जिनकी देखने की क्षमता सामान्य बालकों की अपेक्षा अत्यधिक कम होती है या बिल्कुल नहीं होती। दृष्टि मनुष्य के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संवेदन माध्यम है, जिसके बिना व्यक्ति अपने आसपास की वस्तुओं, लोगों और परिस्थितियों का प्रत्यक्ष अनुभव नहीं कर सकता।

जब किसी बालक की दृष्टि क्षमता इतनी कम हो जाए कि वह सामान्य आकार के अक्षरों या वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता, तो उसे दृष्टि बाधित बालक कहा जाता है। कुछ बालक आंशिक रूप से दृष्टिबाधित होते हैं, जो बड़े अक्षरों या मोटे छापे की पुस्तकें पढ़ सकते हैं; जबकि कुछ पूर्णतः अंध (Totally Blind) होते हैं, जो किसी भी दृश्य सूचना को ग्रहण नहीं कर पाते।

दृष्टि बाधिता का मापन स्नेलन चार्ट (Snellen Chart) द्वारा किया जाता है। उदाहरणतः यदि किसी बालक की दृष्टि 20/200 है, तो इसका अर्थ है कि वह वही वस्तु 20 फीट से देख सकता है, जिसे सामान्य व्यक्ति 200 फीट से देख सकता है।

2. परिभाषा (Definition) :-

अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (1934) के अनुसार :-
"A legally blind person is one who has a visual acuity of 20/200 or less in the better eye even with correction, or whose field of vision is so restricted that it subtends an angle of 20 degrees or less."

अर्थात् कानूनी दृष्टि से वे व्यक्ति दृष्टिबाधित माने जाते हैं -
  1. जिनकी दृष्टि शक्ति 20/200 या उससे कम हो (चश्मे से सुधार के बाद भी)।
  2. अथवा जिनका दृष्टि क्षेत्र (Field of Vision) इतना सीमित हो कि वह 20 डिग्री या उससे कम कोण बनाता हो।

3. दृष्टि बाधिता के प्रकार (Types of Visual Impairment) :-

पूर्ण दृष्टिबाधिता (Total Blindness) :-
  • ऐसे बालक किसी प्रकार की दृश्य सूचना ग्रहण नहीं कर पाते।
  • उन्हें शिक्षा हेतु ब्रेल लिपि (Braille Script), श्रवण (Hearing) और स्पर्श (Touch) आधारित शिक्षण विधियों की आवश्यकता होती है।
आंशिक दृष्टिबाधिता (Partial or Low Vision) :-
  • ऐसे बालक कुछ हद तक वस्तुएँ देख सकते हैं।
  • मोटे अक्षर या निकट वस्तुएँ पढ़ सकते हैं।
  • उचित प्रकाश, आवर्धक काँच (Magnifying Lens) या विशेष साधनों के प्रयोग से सामान्य विद्यालयों में पढ़ सकते हैं।

4. दृष्टि बाधिता के कारण (Causes of Visual Impairment) :-

जन्मजात कारण (Congenital Causes) :-
गर्भावस्था के दौरान संक्रमण, आनुवंशिक दोष या मस्तिष्कीय विकास में असामान्यता के कारण बालक अंधत्व से ग्रस्त हो सकता है।
नेत्र रोग (Eye Diseases) :-
जैसे मोतियाबिंद (Cataract), ग्लूकोमा (Glaucoma), रेटिनाइटिस, नेत्र तंत्रिका की कमजोरी आदि।
दुर्घटना या चोट (Injury or Trauma) :-
आँख या सिर पर लगी चोटें स्थायी दृष्टि हानि का कारण बन सकती हैं।
पोषण की कमी (Nutritional Deficiency) :-
विशेषकर विटामिन ‘A’ की कमी से नेत्रों की प्रकाश ग्रहण करने की क्षमता घट जाती है।
तंत्रिका संबंधी कारण (Neurological Causes) :-
जब मस्तिष्क के दृश्य केंद्र (Visual Cortex) में क्षति होती है, तो बालक देखने में असमर्थ हो जाता है।

5. दृष्टि बाधित बालकों की विशेषताएँ (Characteristics of Visually Impaired Children) :-

दृष्टि बाधित बालकों की विकासात्मक विशेषताएँ सामान्य बालकों से कुछ भिन्न होती हैं। इन्हें तीन मुख्य वर्गों में विभाजित किया जा सकता है -
(क) भाषा विकास संबंधी विशेषताएँ (Language Development) :-
  • दृष्टिबाधित बालक सुनने और बोलने में सक्षम होते हैं, इसलिए इनमें भाषा दोष नहीं होता।
  • ये श्रवण के माध्यम से शब्द सीखते हैं, न कि देखकर।
  • इनकी अभिव्यक्ति शाब्दिक (verbal) होती है, किंतु अनुभवात्मक (experiential) नहीं, क्योंकि इंद्रिय बोध सीमित होता है।
  • रंग, आकार और दूरी जैसी संकल्पनाएँ इनके लिए अमूर्त (abstract) होती हैं।
  • फिर भी, ये बालक भाषा अधिगम में अत्यंत सक्रिय और सचेत होते हैं।
(ख) मानसिक योग्यता संबंधी विशेषताएँ (Mental Abilities) :-
  • दृष्टिबाधित बालक बुद्धि और संज्ञानात्मक क्षमता में सामान्य बालकों से कम नहीं होते।
  • उचित अवसर मिलने पर ये उच्च स्तर की रचनात्मकता और समस्या समाधान क्षमता प्रदर्शित करते हैं।
  • इनका दूरी का बोध दृष्टि पर नहीं, बल्कि श्रवण और स्पर्श पर आधारित होता है।
  • इनके ज्ञान का प्रमुख स्रोत स्पर्श अनुभव (Tactile Experience) होता है, जो दो प्रकार का होता है:
  1. विश्लेषणात्मक स्पर्श अनुभव (Analytical Touch) :- वस्तु के अलग-अलग भागों को स्पर्श कर मानसिक चित्र बनाना।
  2. संश्लेषणात्मक स्पर्श अनुभव (Synthetic Touch) :- वस्तु को समग्र रूप से स्पर्श कर उसका पूर्ण बोध प्राप्त करना।
  • इनकी एकाग्रता (Concentration) और सुनने की क्षमता (Listening Skill) अत्यधिक विकसित होती है।
(ग) सामाजिक एवं कार्य समायोजन (Social and Occupational Adjustment) :-
  • सामाजिक वातावरण में दृष्टिबाधित बालकों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  • ये बालक स्वयं को अन्य साथियों की तुलना में अलग अनुभव करते हैं।
  • कई बार समाज इन्हें सहानुभूति (sympathy) तो देता है, परंतु स्वीकृति (acceptance) नहीं।
  • गंभीर रूप से दृष्टिबाधित बालकों के प्रति समाज का व्यवहार सहानुभूतिपूर्ण होता है, जबकि आंशिक दृष्टिबाधितों के प्रति उदासीनता पाई जाती है।
  • उचित सामाजिक प्रशिक्षण और समर्थन से ये बालक सामान्य रूप से कार्य कर सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

6. दृष्टि बाधित बालकों की शिक्षा (Education of Visually Impaired Children) :-

शिक्षा के क्षेत्र में दृष्टिबाधित बालकों के लिए कुछ विशेष शिक्षण पद्धतियाँ और सुविधाएँ आवश्यक होती हैं -
ब्रेल पद्धति (Braille System) :-
दृष्टिबाधितों के लिए विकसित यह स्पर्श आधारित लेखन प्रणाली छह बिंदुओं (six-dot cells) पर आधारित है, जिससे वे पढ़ने और लिखने में सक्षम होते हैं।
श्रवण आधारित शिक्षण (Auditory Learning) :-
ऑडियो बुक्स, टेप रिकॉर्डर, स्पीकिंग सॉफ्टवेयर आदि के माध्यम से शिक्षण।
सहायक उपकरणों का उपयोग (Use of Assistive Devices) :-
जैसे आवर्धक काँच (Magnifier), टॉकिंग वॉच, स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर (JAWS, NVDA), और ऑडियो नोट्स।
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) :-
सामान्य विद्यालयों में दृष्टिबाधित बालकों को अध्ययन का अवसर देते हुए, संसाधन शिक्षक (Resource Teacher) और विशेष सहायक साधनों की व्यवस्था की जानी चाहिए।
पूर्व प्रशिक्षण (Pre-educational Training) :-
विद्यालय में प्रवेश से पूर्व चलना-फिरना, दिशा ज्ञान, वस्तु पहचान और आत्मनिर्भरता के अभ्यास कराए जाने चाहिए।
पुनर्वास एवं परामर्श (Rehabilitation and Counselling) :-
भावनात्मक सहयोग, आत्मविश्वास निर्माण और व्यावसायिक मार्गदर्शन द्वारा इन्हें समाज में स्वावलंबी बनाया जा सकता है।

7. दृष्टि बाधिता के सामाजिक प्रभाव (Social Impacts of Visual Impairment) :-

  • दृष्टिबाधित व्यक्ति अपने परिवेश से सीमित संपर्क बना पाते हैं।
  • सामाजिक, सांस्कृतिक एवं मनोरंजन गतिविधियों में उनकी भागीदारी कम होती है।
  • आत्मसम्मान (Self-esteem) और आत्मविश्वास (Self-confidence) में कमी आ सकती है।
  • यदि परिवार एवं समाज सहयोगी दृष्टिकोण अपनाएँ, तो ये बालक भी समाज के उपयोगी सदस्य बन सकते हैं।

दृष्टि बाधित बालक समाज के लिए बोझ नहीं, बल्कि एक संवेदनशील एवं सक्षम मानव संसाधन हैं।
यदि उन्हें समान अवसर, उचित शिक्षण व्यवस्था, सहायक उपकरण और सकारात्मक सामाजिक वातावरण मिले, तो वे भी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

शिक्षकों, अभिभावकों और समाज का यह नैतिक दायित्व है कि वे इन बालकों के प्रति सहानुभूति, सहयोग और समावेशिता की भावना रखें।
समुचित प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और प्रोत्साहन से ये बालक भी सामान्य बालकों की तरह जीवन में आत्मनिर्भर और सफल बन सकते हैं।

References :-
Hallahan, D. P., & Kauffman, J. M. (2017). Exceptional Learners: An Introduction to Special Education.
Kirk, S. A., Gallagher, J. J. (2000). Education of Exceptional Children.
NCERT (2022). Inclusive Education for Children with Disabilities.
Jangira, N. K. (2005). Special Education: Emerging Trends.
WHO (World Health Organization). Visual Impairment and Blindness – Fact Sheet.

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