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बाल अपराधिता के कारण एवं विश्लेषण

Causes and analysis of juvenile delinquency

किसी भी राष्ट्र की प्रगति का आधार उसके बच्चे होते हैं। बालक यदि सही दिशा में बढ़ते हैं तो समाज उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर होता है, परंतु यदि वे विपरीत मार्ग अपनाते हैं, तो यह न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए संकट का कारण बन जाता है।
इन्हीं परिस्थितियों से जन्म लेती है - बाल अपराधिता (Juvenile Delinquency)।

बाल अपराधिता वह स्थिति है जब कोई नाबालिग बालक या किशोर ऐसे कार्य करता है जो सामाजिक नियमों, नैतिक मूल्यों या कानून के विरुद्ध हों। आज समाज में बढ़ते अपराधों में बाल अपराधों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। इसका कारण केवल व्यक्तिगत कमजोरी नहीं, बल्कि सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियाँ भी हैं।

1. आनुवांशिक एवं जैविक कारण (Hereditary and Biological Causes)

(क) अपराधी प्रवृत्ति का वंशानुक्रम :-
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार कुछ बच्चे ऐसी प्रवृत्तियों के साथ जन्म लेते हैं जो उन्हें अपराध की ओर झुकाव देती हैं। वैलेंटाइन ने कहा था कि “अनुवांशिक लक्षण अपराधी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देते हैं।”
यदि माता-पिता के स्वभाव में आक्रामकता, झूठ या असंवेदनशीलता है, तो बच्चे में भी वैसी प्रवृत्तियाँ विकसित होने की संभावना रहती है।
 
(ख) गुणसूत्रीय असामान्यताएँ :-
मेडीनस और जॉनसन ने बताया कि कुछ दुर्लभ स्थितियों में बच्चों के गुणसूत्रों में असामान्यताएँ होती हैं, जैसे पुरुषों में XYY संरचना। ऐसी दशा में बालक का व्यवहार आवेगपूर्ण और नियंत्रणहीन हो सकता है।
 
(ग) शारीरिक गठन :-
कुछ बच्चों का शरीर मजबूत, गठीला और ऊर्जा से भरपूर होता है। यदि उनकी ऊर्जा को सही दिशा न मिले तो यह शक्ति हिंसक या आक्रामक व्यवहार में बदल जाती है। गुलक एवं गुलक ने भी पाया कि कुछ विशेष शारीरिक प्रकार अपराध की प्रवृत्ति से जुड़े होते हैं। 

2. शारीरिक कारण (Physiological Causes)

(क) शारीरिक दोष :-
शारीरिक दोष बालक को मानसिक रूप से कमजोर बना सकते हैं। उपहास और तिरस्कार के कारण उनमें बदले की भावना जन्म लेती है। उदाहरणस्वरूप, कमजोर दृष्टि वाला एक बालक दूसरों का चश्मा चुराने लगा क्योंकि वह स्वयं उपेक्षित महसूस करता था।
 
(ख) यौन अंगों का तीव्र विकास :-
किशोरावस्था में हार्मोनल परिवर्तन बच्चों के व्यवहार पर गहरा प्रभाव डालते हैं। यदि इस अवस्था में सही शिक्षा और दिशा न मिले तो वे जिज्ञासा या उत्तेजना के कारण अनुचित कार्य करने लगते हैं।

3. मनोवैज्ञानिक कारण (Psychological Causes)

(क) निम्न बुद्धि स्तर :-
बुद्धि लब्धि (IQ) कम होने से बालक सही-गलत का निर्णय नहीं कर पाते। बर्ट के अध्ययन के अनुसार, अधिकांश अपराधी बालकों की बुद्धि औसत से कम पाई गई।

(ख) मानसिक रोग :-
मानसिक विकार जैसे अवसाद, चिंता, या स्किजोफ्रेनिया बालक की सोच और निर्णय क्षमता को प्रभावित करते हैं। ऐसे बच्चे नियंत्रण खोकर अनुचित कार्य कर बैठते हैं।

(ग) अवरुद्ध इच्छाएँ :-
मैकडूलन के अनुसार, जब बालक की मूल प्रवृत्तियों जैसे खेलना, स्वतंत्र बोलना, या अभिव्यक्ति को रोका जाता है, तो उसमें विद्रोह पनपता है। यह दबी हुई ऊर्जा अपराध के रूप में प्रकट होती है।

(घ) निराशा और हीनता :-
हरलॉक ने कहा है - “आक्रमण निराशा की सामान्य प्रतिक्रिया है।”
जो बालक बार-बार असफलता का सामना करता है, वह धीरे-धीरे आक्रामक बन जाता है। निराशा, अकेलापन और हीन भावना उसे अपराध की ओर ले जाते हैं।

(ङ) संवेगात्मक असंतुलन :-
प्रेम, सहानुभूति और सुरक्षा की कमी बालक को भावनात्मक रूप से अस्थिर बना देती है। हैलो और बरौक के अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश अपराधी बालकों ने अपने जीवन में भावनात्मक उपेक्षा का अनुभव किया था।

4. आर्थिक कारण (Economic Causes)

(क) गरीबी :-
गरीबी वह जड़ है जिससे कई सामाजिक बुराइयाँ जन्म लेती हैं। जब बालक की मूल आवश्यकताएँ - भोजन, वस्त्र, शिक्षा - पूरी नहीं होतीं, तो वह चोरी, झूठ या हिंसा का सहारा लेता है।
गरीबी से उत्पन्न स्थितियाँ जैसे - गंदी बस्तियाँ, मनोरंजन के अभाव, पारिवारिक कलह, और भुखमरी - बाल अपराधिता को जन्म देती हैं।

(ख) बेकारी :-
“खाली दिमाग शैतान का घर होता है।”
जब किशोरावस्था में रोजगार न मिले तो बालक असंतोष से भर जाता है और गलत मार्ग अपनाता है। भारत में बाल विवाह जैसी प्रथाएँ भी युवाओं पर समय से पहले जिम्मेदारी डाल देती हैं, जिससे वे दबाव में अपराध की ओर बढ़ते हैं।

(ग) अनुपयुक्त व्यवसाय :-
यदि बालक को उसकी रुचि के विपरीत काम करने को मजबूर किया जाए, तो वह जल्दी निराश होता है। धीरे-धीरे उसमें अपने कार्य या समाज के प्रति विद्रोह की भावना उत्पन्न होती है।

5. पारिवारिक कारण (Family Causes)

(क) भग्न परिवार :-
तलाक, माता-पिता की मृत्यु या निरंतर झगड़े के कारण परिवार टूट जाता है। हीली और ब्रोनर के अनुसार, लगभग आधे अपराधी बालक टूटे परिवारों से थे। ऐसे बालकों में असुरक्षा और उपेक्षा की भावना होती है।

(ख) सौतेले माता-पिता का व्यवहार :-
सौतेले माता-पिता द्वारा किया गया अन्याय या कठोरता बालक के मन में प्रतिशोध की भावना भर देता है। “विमाता ग्रंथि” इसी कारण विकसित होती है।

(ग) अनैतिक पारिवारिक वातावरण :-
जब घर में माता-पिता या परिजन झूठ, हिंसा या अनुचित व्यवहार करते हैं, तो बालक भी वही आचरण सीखता है। मिस इलियट के अध्ययन के अनुसार, 67% अपराधी बालिकाएँ अनैतिक परिवारों से थीं।

(घ) भेदभाव और उपेक्षा :-
जब माता-पिता एक बच्चे को अधिक और दूसरे को कम स्नेह देते हैं, तो उपेक्षित बच्चा विरोध या अपराध की ओर अग्रसर होता है।

6. सामाजिक कारण (Social Causes)

समाज बालक के व्यवहार को आकार देता है। बुरे मित्र, अस्वस्थ पड़ोस, अपराधी व्यक्तियों का साथ, और नकारात्मक मनोरंजन के साधन - ये सभी उसे गलत दिशा में ले जाते हैं।
हीली के अनुसार, 34% बाल अपराध बुरी संगति का परिणाम हैं।
सामाजिक कारणों में शामिल हैं -
  • अपराधी या असंवेदनशील पड़ोस
  • मनोरंजन के गलत साधन
  • हिंसक फिल्मों और सोशल मीडिया का प्रभाव
  • सामाजिक अन्याय, गरीबी, और प्रतिस्पर्धा

7. विद्यालय संबंधी कारण (School-Related Causes)

विद्यालय वह स्थान है जहाँ बालक का चरित्र निर्माण होता है। परंतु यदि वहाँ अनुशासन, समझ और संवेदना का अभाव हो, तो बालक अपराध की ओर बढ़ सकता है।
मुख्य कारण -
  • शिक्षकों द्वारा कठोर व्यवहार
  • अत्यधिक दंड या अपमान
  • अरुचिकर शिक्षण पद्धति
  • खेल और मनोरंजन की कमी
  • प्रतियोगिता और पक्षपात
इन कारणों से बालक विद्यालय से दूरी बना लेता है और अनुशासनहीनता के रास्ते पर चल पड़ता है।

8. संप्रेषण के साधन (Mass Media)

आज का युग तकनीक का है। बच्चे फिल्मों, टीवी, मोबाइल और इंटरनेट से बहुत प्रभावित होते हैं।
हिंसा, अपराध या भोगवाद पर आधारित सामग्री बालक को गलत दिशा में प्रेरित करती है। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे मीडिया के प्रयोग पर नियंत्रण रखें और बच्चों को सही सामग्री से जोड़ें।

9. सांस्कृतिक कारण (Cultural Causes)

भारतीय संस्कृति सदैव नैतिकता और संयम पर आधारित रही है, परंतु आधुनिक भौतिकवाद ने इन मूल्यों को कमजोर कर दिया है। जब समाज की संस्कृति दिशाहीन हो जाती है, तो युवा और बालक भी भटक जाते हैं।
मेडीसन और जॉनसन ने कहा कि आधुनिक आंदोलनों में संस्कृति से विच्छेद और असंतुलन स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion) :-
बाल अपराधिता केवल किसी एक कारण का परिणाम नहीं है, बल्कि यह कई सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक कारणों की संयुक्त उपज है।
यदि हम इन सभी पहलुओं पर ध्यान दें -
  • परिवार में प्रेम, संवाद और सहयोग बढ़ाएँ,
  • विद्यालयों में परामर्श व सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ प्रोत्साहित करें,
  • समाज में रोजगार और शिक्षा के अवसर बढ़ाएँ,
  • तथा मीडिया में सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा दें -
तो बाल अपराधिता को काफी हद तक रोका जा सकता है।
बालक केवल भविष्य नहीं हैं - वे वर्तमान के निर्माणकर्ता हैं। उन्हें सही दिशा देना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

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