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बहुबाधिता का अर्थ परिभाषाएँ

Meaning of Multi-Handicapped Children

अर्थ (Meaning)

“बहुबाधिता” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है - ‘बहु’ अर्थात अनेक, और ‘बाधिता’ अर्थात असमर्थता या अपंगता
इस प्रकार, बहुबाधिता (Multiple Disabilities) का अर्थ है - ऐसी स्थिति जिसमें किसी बालक में दो या दो से अधिक प्रकार की असमर्थताएँ एक साथ विद्यमान हों।
उदाहरण के लिए, यदि कोई बालक एक साथ अंधा और बहरा है, या शारीरिक रूप से अपंग होने के साथ-साथ मानसिक मंदता से भी ग्रसित है, तो उसे बहुबाधित बालक कहा जाएगा।

ऐसे बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक जटिल आवश्यकताओं वाले होते हैं। इन्हें न केवल चिकित्सीय सहायता बल्कि विशेष शिक्षण व्यवस्था, भावनात्मक सहयोग और निरंतर परामर्श की आवश्यकता होती है।

परिभाषाएँ (Definitions)

सचवार्ट्ज (Schwartz) के अनुसार –
“बहुबाधित बालक वह है जिसमें दो या उससे अधिक असमर्थताएँ विद्यमान हों, और जिनका ध्यान उसकी शिक्षा, देखभाल तथा भविष्य की योजना बनाते समय रखना आवश्यक हो।”

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुसार,
“बहुबाधित बच्चे वे होते हैं जिन्हें सीखने और समाज में समायोजन के लिए बहु-आयामी सहयोग और विशेष सेवाओं की आवश्यकता होती है।”

बहुबाधिता के उदाहरण (Examples of Multiple Disabilities)

बहुबाधिता की स्थितियाँ विविध प्रकार की हो सकती हैं, जैसे -
  • अंधापन और बहरापन दोनों से ग्रसित बालक।
  • मानसिक पक्षाघात के साथ शारीरिक अपंगता वाला बालक।
  • बहरा-अंधा और वाक् दोष से पीड़ित बालक।
  • मिर्गी और मेरुदण्डीय विकृति से ग्रस्त बालक।
  • दृष्टि दोष के साथ वाणी या हाथ-पैर की अक्षमता वाला बालक।
इन स्थितियों में बालक की शिक्षा और विकास की दिशा पूरी तरह से विशिष्ट शैक्षणिक तकनीकों और उपकरणों (Assistive Devices) पर निर्भर करती है।

बहुबाधिता के वर्ग (Types of Multi-handicap)

बहुबाधिता को सामान्यतः दो मुख्य वर्गों में बाँटा जा सकता है -
1. शारीरिक रूप से बाधित बालक (Physically Handicapped Children) :-
  • ऐसे बालकों में शरीर के किसी अंग की असमर्थता होती है।
  • उदाहरण - पोलियो, लकवा, दृष्टि दोष, श्रवण दोष, वाणी दोष, या अंग विच्छेदन।
  • इन बालकों में अक्सर हीनभावना, सामाजिक भय या आत्मसंकोच देखा जाता है।
  • फिर भी, ये बच्चे मानसिक रूप से सक्षम हो सकते हैं और यदि उचित सहयोग, कृत्रिम उपकरण (prosthetic aids) और अनुकूल वातावरण मिले, तो ये सामान्य बालकों की तरह जीवनयापन कर सकते हैं।
2. मानसिक रूप से बाधित बालक (Mentally Handicapped Children) :-
  • इन बालकों में बौद्धिक विकास सामान्य से कम होता है।
  • वे नई चीजें सीखने, समझने और सामाजिक संबंध बनाने में कठिनाई महसूस करते हैं।
  • इनकी बुद्धि-लब्धि (IQ) सामान्यतः 70 से कम होती है।
  • मानसिक मंदता हल्की, मध्यम, या गंभीर स्तर की हो सकती है।
  • अल्पबुद्धि, जड़ या मूढ़ बालक इसी श्रेणी में आते हैं।
  • इनके साथ-साथ संवेगात्मक अस्थिरता (Emotional instability) और सामाजिक असमायोजन (Social maladjustment) भी देखने को मिलता है।

बहुबाधिता के कारण (Causes of Multiple Disabilities)

बहुबाधिता अनेक कारणों से उत्पन्न हो सकती है, जैसे :
  • जैविक कारण - गर्भावस्था के दौरान संक्रमण, पोषण की कमी, या प्रसवकालीन जटिलताएँ।
  • आनुवंशिक कारण - वंशानुगत बीमारियाँ या जीन दोष।
  • शारीरिक कारण - मस्तिष्क में चोट, दुर्घटना, या जन्म के बाद होने वाली बीमारियाँ।
  • पर्यावरणीय कारण - प्रदूषण, दवाओं का गलत प्रयोग, या सामाजिक उपेक्षा।

बहुबाधित बालकों के लिए शिक्षा और सहयोग (Education & Support)

बहुबाधित बालकों की शिक्षा के लिए सामान्य शिक्षण पद्धतियाँ पर्याप्त नहीं होतीं। इनके लिए आवश्यक है -
  1. समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का वातावरण।
  2. विशेष शिक्षक (Special Educator) की सहायता।
  3. परामर्श सेवाएँ (Counselling Services)
  4. सहायक तकनीकें (Assistive Technologies) जैसे - ब्रेल, श्रवण यंत्र, कंप्यूटर आधारित भाषा उपकरण आदि।
  5. मनोवैज्ञानिक और चिकित्सकीय सहयोग ताकि बच्चे में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता विकसित हो।

वाणी बाधिता (Speech Impaired Children)

अर्थ (Meaning)

वाणी बाधिता ऐसी अवस्था है जिसमें बालक की बोलने, उच्चारण करने या संप्रेषण की क्षमता किसी न किसी रूप में प्रभावित होती है।
यह शारीरिक, तंत्रिका संबंधी या मनोवैज्ञानिक कारणों से हो सकती है।
वाणी बाधित बालक बोलते समय हकलाते हैं, शब्दों को तोड़-मरोड़ कर बोलते हैं या बोलने में असामान्य रुकावटें आती हैं।

परिभाषाएँ (Definitions)

राइपर (Riper, 1978) के अनुसार -
“वाणी बाधित बालक वह है जिसकी वाणी और संप्रेषण की प्रक्रिया सामान्य बालकों से भिन्न होती है और जो अपनी बात कहने में कठिनाई महसूस करता है।”

परकिंस (Perkins, 1977) के अनुसार -
“जब किसी व्यक्ति की वाणी व्याकरणिक, सांस्कृतिक और शारीरिक दृष्टि से असंतोषजनक हो, तब उसे वाणी बाधिता की श्रेणी में रखा जाता है।”

जॉन डिसेंसन (John Dissenson) के अनुसार -
“वाणी बाधिता तब होती है जब बालक की बोली श्रोता के लिए स्पष्ट न हो और ध्यान देने पर भी समझ न आए।”

वाणी बाधिता के प्रकार (Types of Speech Impairment)

स्वर दोष (Voice Disorder) :-
आवाज में कंपन, फटना या अनावश्यक ऊँचाई-नीचाई आना।

उच्चारण दोष (Articulation Disorder) :-
जीभ, तालु या जबड़े के दोष के कारण शब्दों का गलत उच्चारण।

धाराप्रवाह दोष (Fluency Disorder) :-
हकलाना, तुतलाना या बोलते समय रुक-रुककर बोलना।

नासिक्य दोष (Resonance Disorder) :-
स्वर में नाक की ध्वनि का अधिक प्रयोग जिससे बोलना अस्पष्ट हो जाता है।

वाणी बाधित बालकों की विशेषताएँ (Characteristics of Speech Impaired Children)

  1. बोलते समय लय और ताल का अभाव रहता है।
  2. उनकी आवाज कभी बहुत तेज़ तो कभी बहुत धीमी होती है।
  3. वाणी में हकलाहट, तुतलाहट या झिझक दिखाई देती है।
  4. जीभ या तालु की असामान्यता के कारण शब्द स्पष्ट नहीं निकलते।
  5. बोलते समय वे बहुत ध्यान केंद्रित (conscious) रहते हैं जिससे संप्रेषण में तनाव उत्पन्न होता है।
  6. कुछ बालक अपनी कमी को छिपाने के लिए बोलने से बचते हैं या समूह में चुप रहते हैं।

वाणी बाधित बालकों की समस्याएँ (Problems of Speech Impaired Children)

सामाजिक अस्वीकृति (Social Rejection) :-
अन्य बच्चे उन्हें चिढ़ाते हैं या उनका मज़ाक उड़ाते हैं, जिससे उनमें आत्महीनता आती है।

भावनात्मक तनाव (Emotional Stress) :-
बोलने में कठिनाई के कारण उनमें चिंता और आत्मसंकोच विकसित होता है।

शैक्षिक कठिनाइयाँ (Academic Problems) :-
कक्षा में उत्तर न दे पाने या मौखिक परीक्षा में कठिनाई के कारण उनकी प्रगति धीमी होती है।

सामाजिक अलगाव (Social Isolation) :-
वे समूह क्रियाओं, खेलों या वार्तालापों से दूर रहते हैं।

भाषाई विकास की कमी :-
शब्द भंडार सीमित हो जाता है, जिससे संप्रेषण और लेखन दोनों प्रभावित होते हैं।

समाधान एवं शिक्षण उपाय (Remedial and Educational Measures)

  1. Speech Therapy :- विशेषज्ञ की सहायता से नियमित उच्चारण अभ्यास।
  2. Individual Attention :- प्रत्येक बालक की विशेष आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षण योजना।
  3. भावनात्मक सहयोग :- शिक्षक और अभिभावक दोनों का संवेदनशील व्यवहार।
  4. सांकेतिक भाषा एवं तकनीकी सहयोग :- जैसे डिजिटल ऐप्स, वॉयस ट्रेनिंग सॉफ्टवेयर आदि।
  5. सकारात्मक वातावरण :- सहपाठियों को जागरूक करना कि वाणी दोष कोई कमजोरी नहीं है।

References :-
Riper, C. (1978). Speech Correction: Principles and Methods.
Perkins, W. H. (1977). Speech Pathology and Communication Disorders.
NCERT (2021). Inclusive Education for Children with Special Needs.
Sharma, R. A. (2018). Educational Psychology. Loyal Book Depot, Meerut.
IGNOU (2022). Psychology of Learning and Development (ES-211).



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