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अधिगम असमर्थता के प्रकार

Types of Learning Disabilities

अधिगम असमर्थता एक बहुआयामी समस्या है जो बालक के सीखने की प्रक्रिया के विभिन्न पक्षों को प्रभावित करती है। किसी बालक को पढ़ने में कठिनाई होती है, तो किसी को लिखने, बोलने, समझने या गणना करने में परेशानी होती है। सामान्यतः इसे चार मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है -

पाठन संबंधी बाधिता (Reading Disability / Dyslexia)

पाठन संबंधी बाधिता वाले बालक अक्षरों, शब्दों और वाक्यों को सही ढंग से पहचानने और उनका अर्थ समझने में कठिनाई अनुभव करते हैं।
ऐसे बालक शब्दों के क्रम को उलट देते हैं, कुछ शब्दों को छोड़ देते हैं या पढ़ते समय उनका उच्चारण गलत कर देते हैं।
यह समस्या कभी-कभी सूक्ष्म रूप में होती है, जिसमें बालक केवल धीमी गति से पढ़ता है, जबकि गंभीर अवस्था में बालक की पढ़ने की क्षमता लगभग समाप्त हो जाती है।
            उदाहरणतः - बालक “घर” शब्द को “हर” या “रघ” के रूप में पढ़ सकता है।

यदि समय पर पहचान की जाए और शिक्षण पद्धति को उपयुक्त बनाया जाए तो ऐसे बालकों की सहायता कक्षा के सामान्य वातावरण में की जा सकती है।

लेखन संबंधी बाधिता (Writing Disability / Dysgraphia)

लेखन संबंधी बाधिता से ग्रसित बालक लिखने की प्रक्रिया में कठिनाई अनुभव करते हैं।
वे अक्षरों को सही आकार में नहीं बना पाते, शब्दों के बीच अंतराल नहीं रखते या वाक्य की संरचना त्रुटिपूर्ण होती है।
सामान्य अवस्था में उनकी लिखावट अस्पष्ट और असंगठित होती है, जबकि गंभीर अवस्था में बालक स्वयं से लिखने में असमर्थ हो जाता है और केवल नकल (copy) करके ही कार्य कर पाता है।
          इस अवस्था में सुधारात्मक अभ्यास (remedial practice) जैसे मोटर स्किल्स का प्रशिक्षण, अक्षर पहचान खेल, और वर्तनी अभ्यास उपयोगी सिद्ध होते हैं।

संप्रेषण या भाषा संबंधी बाधिता (Language and Communication Disability)

इस समस्या से प्रभावित बालक को बोले गए या लिखित शब्दों को समझने में कठिनाई होती है।
वे दूसरों की बातों को ग्रहण करने या अपने विचारों को सही शब्दों में व्यक्त करने में असमर्थ रहते हैं।
कभी-कभी बालक चिन्हों, संकेतों या वाक्य संरचनाओं को पहचान नहीं पाता, जिससे वह संवाद स्थापित करने में असहज महसूस करता है।

यदि प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उचित सहायता दी जाए - जैसे भाषण चिकित्सा (speech therapy), भाषा खेल, या वार्तालाप अभ्यास - तो बालक की संप्रेषणीय क्षमता में सुधार किया जा सकता है।
गंभीर अवस्था में यह समस्या पढ़ने, लिखने, बोलने और समझने, चारों ही क्षेत्रों को प्रभावित करती है।

संख्यात्मक या गणितीय बाधिता (Numerical / Mathematical Disability / Dyscalculia)

यह बाधिता उन बालकों में पाई जाती है जिन्हें संख्याओं, गणनाओं और गणितीय प्रतीकों को समझने में कठिनाई होती है।
वे जोड़, घटाव, गुणा या भाग जैसी सामान्य गणनाएँ करने में असमर्थ रहते हैं।
संख्याओं का क्रम, मान या स्थान मूल्य (place value) को समझने में उन्हें भ्रम होता है।
     उदाहरणतः - “23” और “32” में अंतर समझने में कठिनाई या 8+5 = ? जैसी साधारण गणना में बार-बार भूल।

ऐसे बालकों को गणित सिखाने में दृश्य सामग्रियों, चित्रों, गणितीय खेलों और उपकरणों का प्रयोग अत्यंत लाभदायक होता है।

अधिगम असमर्थता के कारण (Causes of Learning Disabilities)

अधिगम असमर्थता के कारण बहुआयामी होते हैं, जिन्हें प्रमुखतः जैविक, वंशानुगत और वातावरणीय तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है -

जैविक कारण (Biological Causes) :-
यह कारण बालक के मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (central nervous system) के असामान्य कार्य से संबंधित होते हैं।
जब मस्तिष्क की सूक्ष्म प्रक्रियाएँ सुचारू रूप से कार्य नहीं कर पातीं, तो सूचना का ग्रहण, संसाधन और अभिव्यक्ति बाधित हो जाती है।
जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, मस्तिष्क पर चोट, या संक्रमण भी इसके कारण बन सकते हैं।

वंशानुगत कारण (Genetic Causes) :-
अधिगम असमर्थता का एक प्रमुख कारण आनुवंशिक होता है।
शोधों से ज्ञात हुआ है कि ऐसे बालकों के परिवारों में अधिगम कठिनाइयों या भावनात्मक अस्थिरता का इतिहास प्रायः मिलता है।
यदि माता-पिता में से किसी एक को ऐसी समस्या रही हो, तो बालक में भी इसके लक्षण पाए जाने की संभावना अधिक रहती है।

वातावरणीय कारण (Environmental Causes) :-
कभी-कभी बालक के विकास में बाह्य परिस्थितियाँ भी अधिगम असमर्थता को जन्म देती हैं।
गर्भावस्था में मातृ स्वास्थ्य की उपेक्षा, नशीले पदार्थों का सेवन, प्रसव के समय चोट या ऑक्सीजन की कमी - ये सभी कारण मस्तिष्क की संरचना को प्रभावित कर सकते हैं।
इसी प्रकार बालक का सामाजिक-शैक्षणिक वातावरण - जैसे शिक्षण में रूचि का अभाव, असंवेदनशील शिक्षक, पारिवारिक अस्थिरता या अनुचित अनुदेशन - भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं।

अधिगम असमर्थ बालकों की विशेषताएँ (Characteristics of Learning Disabled Children)

क्लेमेंट्स (Clements, 1966) ने अधिगम असमर्थ बालकों का गहन अध्ययन कर उनकी प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख किया है। सामान्यतः ऐसे बालकों में निम्न लक्षण पाए जाते हैं -
  1. अतिक्रिया (Hyperactivity) :- ये बालक अत्यधिक सक्रिय रहते हैं, स्थिर होकर बैठ नहीं पाते और बार-बार ध्यान भटकता है।
  2. संवेगात्मक अस्थिरता (Emotional Instability) :- इनमें भावनात्मक उतार-चढ़ाव, चिड़चिड़ापन या निराशा जल्दी आ जाती है।
  3. अवधान की कमी (Inattention) :- किसी कार्य पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाना।
  4. स्मृति और चिंतन की कमी (Poor Memory and Thinking) :- सीखी हुई बातों को याद रखने या तार्किक रूप से सोचने की क्षमता कमजोर होती है।
  5. मोटर समन्वय की समस्या :- हाथ-पैर का सही ढंग से उपयोग करने या सूक्ष्म गतिविधियाँ करने में कठिनाई।
  6. संवेदी असंतुलन :- दृष्टि, श्रवण, और स्पर्श जैसी इंद्रियों के समन्वय में कमी।
  7. संवेगात्मक प्रतिरोध (Emotional Resistance) :- सुधारात्मक प्रयासों के प्रति असहयोग या विरोध का भाव।
  8. विशिष्ट अधिगम कठिनाई (Specific Learning Deficit) :- किसी एक विशेष क्षेत्र जैसे केवल भाषा, लेखन या गणित में बाधा।
अधिगम असमर्थता कोई स्थायी अक्षमता नहीं, बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सूक्ष्म अंतर का परिणाम है।
यदि समय रहते पहचान कर उचित शिक्षण पद्धतियाँ अपनाई जाएँ, जैसे - विशेष प्रशिक्षण, व्यक्तिगत शिक्षण, खेल आधारित अधिगम और माता-पिता का सहयोग - तो ऐसे बालक भी उत्कृष्ट उपलब्धियाँ प्राप्त कर सकते हैं।
        “हर बालक सीख सकता है, बस हमें उसके सीखने का सही मार्ग समझना होगा।” 


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